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शेयर बेचो मत — किराए पर लगाओ! SLB से पैसा कैसे कमाते हैं? पूरी गाइड पढ़िए






SLB / SLBM: शेयर उधार देना और लेना — पूरी गाइड (Beginner → Advanced)


SLB / SLBM (Securities Lending & Borrowing) — from Basics to Advanced (Complete Guide)

अगर आपके पास शेयर हैं और आप उन्हें अभी बेचने वाले नहीं, तो क्या उन शेयरों से कुछ extra कमाई की जा सकती है? हाँ — NSE / clearing-house की मदद से आपने शेयरों को उधार दे सकते हैं। इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे SLB क्या है, कैसे काम करता है, फायदे-नुकसान क्या हैं, कितनी संभावित कमाई हो सकती है, जोखिम क्या है, और अगर आप खुद करना चाहें तो प्रक्रिया क्या होगी।

Table of Contents


1. SLB / SLBM — यह है क्या?

SEBI द्वारा नियमित, SLB (Securities Lending & Borrowing) या SLBM (Stock Lending & Borrowing Mechanism) शेयर-मार्केट का एक ऐसा माध्यम है जिसमें:

  • जो निवेशक अपने शेयर लंबे समय के लिए रखे हैं और उन्हें तुरंत बेचने का मन नहीं — वे अपने शेयर किसी अन्य ट्रेडर / निवेशक को अस्थायी (कुछ समय के लिए) उधार दे सकते हैं।
  • वहीं, जो ट्रेडर / निवेशक — short-sell करना चाहते हैं, arbitrage करना चाहते हैं, या किसी delivery obligation को पूरा करना चाहते हैं — उन्हें शेयरों की ज़रूरत पड़ती है, लेकिन वो स्वयं शेयर नहीं रखते; वे उन शेयरों को SLB के माध्यम से उधार ले सकते हैं।

इसे समझने के लिए, आप इसे बैंक के fixed-deposit की तरह भी सोच सकते हैं — लेकिन FD की तरह interest नहीं मिलता, बल्कि Share lending-fee (rental fee) मिलती है। 3

2. SLB कैसे काम करता है? (Mechanism & Process)

नीचे SLB का पूरा काम करने वाला flow है:

  • Lender (उधार देने वाला): — आपके पास शेयर (equity shares) होते हैं, जो आप अभी नहीं बेचना चाहते। आप अपने broker / clearing-house के माध्यम से उन शेयरों को लेंड के लिए उपलब्ध कराते हैं। आप यह specify करते हैं कि कितने शेयर, कितनी अवधि के लिए, और प्रति-share कितनी lending-fee चाहते हैं। 4
  • Borrower (उधार लेने वाला): — वह trader / institution जिसे शेयर चाहिए, वो एक order place करता है, दर्शाता है कि कितने शेयर चाहिए, कितनी अवधि, और वो कितनी fee देने को तैयार है। 5
  • Order matching & Clearing-house: — दोनों orders (lend & borrow) exchange के स्क्रीन-based platform पर match होते हैं, price–time priority के आधार पर। clearing house (जैसे NSE Clearing Limited — NCL) transaction को guarantee करता है, यानी counter-party risk बहुत कम हो जाता है। 7
  • Collateral / Margin: — Borrower अक्सर collateral या margin provide करता है, जिससे lender सुरक्षित रहे। 8
  • Tenure & Return: — तय अवधि के अंत में, borrower को वही संख्या में equivalent shares वापस करने होते हैं। lender को lending-fee मिलती है। यदि किसी corporate action (जैसे dividend, bonus, split) होती है, तो borrower उस benefit को भी लेंडर को return करता है। 9
Example: मान लीजिए आपके पास 1,000 शेयर कंपनी XYZ के हैं. आप चाहते हैं कि ये अगले 3 महीने तक idle रहें, लेकिन कुछ earning हो जाए. आप SLB प्लेटफार्म पर 1,000 शेयर, 90 दिन, और say ₹2 प्रति शेयर per month की fee quote करते हैं. अगर किसी borrower को वो शेयर चाहिए, और वो आपके quote से match करता है — तो 90 दिन के लिए वो शेयर उसे मिल जाएंगे। 90 दिन बाद, शेयर वापस आएँगे और आपको ₹ (1,000 × ₹2 × 3) = ₹6,000 मिलेंगे।

3. कौन-कौन से शेयर / securities SLB के लिए eligible होते हैं?

हर शेयर SLB के लिए eligible नहीं होता। आमतौर पर, जिन शेयरों को SLB के लिए चुना जाता है — वे वे होते हैं जो líquid हों, अक्सर F&O (Futures & Options) segment में trade होते हों, या जिनकी demand borrowing / lending के लिए अधिक हो। 10

वास्तव में, NSE / clearing house समय-समय पर “approved securities list” जारी करती है, जिसमें कंपनियों के shares तथा कुछ ETFs शामिल होते हैं। 11

नोट: मतलब ये है कि सिर्फ इसलिए कि आपके पास शेयर है — वो automatically lendable नहीं; पहले देखिए कि वो SLB-eligible हैं या नहीं।

4. कमाई — कितना मिल सकता है? (Illustration + Example)

क्योंकि lending-fee fixed नहीं होती, ये largely demand & supply, liquidity, शेयर की popularity आदि पर निर्भर करती है। फिर भी कुछ सामान्य अनुमान नीचे:

  • कुछ sources बताते हैं कि अधिकांश lenders को अपनी idle portfolio पर “passive income” मिलती है। 12
  • अगर हम hypothetical annualized return मानें, जैसे 6% – 12% per year, तो:
आपके पास ₹1,00,000 value का SLB-eligible शेयर portfolio है।
• अगर annual return = 8%, तो yearly income ≈ ₹8,000 → monthly ≈ ₹666.
• अगर return अच्छा मिले (say 12%), तो yearly ≈ ₹12,000 → monthly ≈ ₹1,000.

यानी ₹1 लाख के idle shares से आप मोटे तौर पर ₹500–₹1,500 प्रति महीने तक कमा सकते हैं — अगर शेयरों की demand बनी रहे।

Important: ये कमाई guaranteed नहीं होती। अगर किसी महीने borrower नहीं मिलता — तो income हो सकती ही नहीं।

5. फायदे (Advantages)

  • निष्क्रिय शेयरों से passive income: आपने जो शेयर लंबे समय के लिए रखे हैं — वो idle हैं, उन्हें लेंड करके extra income मिलती है। 13
  • Ownership benefits बने रहते हैं: चाहे आप शेयर लेंड करें, लेकिन dividend, bonus, rights issue वगैरह का लाभ आपको मिलता है। 14
  • Market liquidity बढ़ती है: Traders, arbitrageurs, short-sellers आसानी से शेयर borrow कर सकते हैं — जिससे market efficient रहता है। 15
  • Risk relatively कम: Clearing-house guarantee के कारण counter-party risk बहुत कम रहता है। 16
  • Flexibility: Lender चाहे तो early recall मांग सकता है; और borrower चाहे तो early return कर सकता है — दोनों के लिए सुविधा मौजूद है। 17

6. जोखिम और सीमाएं (Risks & Limitations)

  • कमाई guaranteed नहीं: अगर demand नहीं है, borrower नहीं मिलेंगे — income 0 हो सकती है।
  • Liquidity risk: कुछ stocks कम liquid होते हैं; ऐसे शेयरों को borrow करना मुश्किल हो सकता है।
  • Market-price fluctuations: अगर शेयर price गिरती है — जबकि आपने पहले लेंड किया — तो nominal value की basis पर fee कम हो सकती है (यदि fee per share तय हो न हो, बल्कि percentage पर हो)।
  • Availability depends on demand: हर समय, हर शेयर नहीं lend होता; demand-supply पर निर्भर होता है।
  • Not all securities eligible: आपका शेयर अगर approved list में नहीं है, तो lend नहीं कर पाएँगे।

7. क्या SLB सुरक्षित है? (Safety & Regulation)

हाँ — SLB भारत में पूरी तरह regulated है। clearing-house (जैसे NCL) guarantee देती है कि transaction fair और secure होगा। 18

इसके अलावा, collateral/margin requirement, daily mark-to-market, और regulated intermediaries होने की वजह से counterparty default risk बहुत कम होता है। 19

लेकिन — जैसा कि ऊपर बताया गया — market risk, liquidity risk, और demand dependency रहता है, इसलिए “safe & guaranteed return” नहीं कहा जा सकता।

8. अगर आप करना चाहें — Step by Step Process

  1. सबसे पहले, सुनिश्चित करें कि आपके पास Demat + Trading Account है, और आपका broker SLB facility देता हो। 20
  2. जांचें कि आपके पास जो शेयर हैं — वो “SLB-eligible / approved securities list” में है या नहीं। 21
  3. अगर eligible है — तो decide करें कि कितने शेयर lend करेंगे, कितने दिनों के लिए, और आप per-share lending fee कितनी चाहते हैं।
  4. SLB order place करें (Lend order) — इसी तरह, अगर आप borrow करना चाहते हों, तो Borrow order place करें। Order matching तब होगी जब कोई counter-party मिले। 22
  5. Order match होने पर — आपके shares clearing-house के माध्यम से borrower को transfer हो जाएंगे, और tenure शुरू हो जाएगा। आपको पता चलेगा कि कितने shares lend हुए।
  6. समय पूरा होने पर या आप early recall करके — shares वापस पायेंगे। साथ में आपको lending-fee / rental fee credited होगी। Dividend/bonus आदि corporate benefits भी मिलेंगे।
  7. ध्यान रखें कि कुछ brokerage charges, GST या processing-fees हो सकती हैं — अपने broker की terms देख लें। 23

9. निष्कर्ष

SLB — आपके long-term या idle शेयरों को एक नए तरीके से उपयोग में लाने का मौका देता है। अगर आप चाहते हैं कि आपके शेयर सिर्फ बैंक/डिमैट में पड़े रहें — तो क्यों न उन्हें temporary-loan पर दे कर कुछ extra income लाभित करें। साथ ही, short-sellers, arbitrageurs या कुछ traders के लिए ये facility market liquidity और flexibility लाती है।

लेकिन यह कोई guaranteed income scheme नहीं है। यह पूरी तरह demand-supply, liquidity और market conditions पर निर्भर है। इसलिए SLB को “bonus passive income + स्मार्ट तरीका” समझना चाहिए — न कि fixed return जैसा।

तो अगर आपके पास SLB-eligible शेयर हैं और आप उन्हें अभी बेचने वाले नहीं — तो SLB आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है।


10. संदर्भ / Useful Links

👨‍💼 Author — Vivek Malviya | Stock Biz

Vivek Malviya भारतीय वित्तीय बाजार में रिसर्च-आधारित रणनीतियों, शिक्षा और ट्रेडिंग सिस्टम डेवलपमेंट के लिए जाने जाते हैं। वे Stock Biz App एवं The Profit Academy के संस्थापक हैं।

उनकी सिग्नेचर स्ट्रेटेजी “दूज का चाँद 🌙 पैटर्न” कई रिटेल ट्रेडर्स के लिए एक simplified और practical market framework बन चुकी है।

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“मार्केट में सफलता strategy + discipline का खेल है — और सही शिक्षा ही पहला कदम है।”

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शेयर बाजार जोखिम आधारित (Market-Linked) होता है। लाभ, आय या रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है। लेखक एवं Stock Biz किसी भी प्रकार की हानि/लाभ, निर्णय या निवेश कार्रवाई के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।

किसी भी निवेश/ट्रेडिंग निर्णय से पहले स्वयं रिसर्च करें या SEBI Registered Investment Advisor / Research Analyst से परामर्श लें।


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